ब्युरो रिपोर्टः उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे उपचुनाव को भाजपा ने सेमीफाइनल के तौर पर लड़ने की रणनीति बनाई है। इसके तहत भाजपा सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट के लिए 9 में से 8 सीटों पर दलित और पिछड़े चेहरे उतारकर उसको तगड़ी चुनौती देने की तैयारी की है। यूपी विधानसभा चुनाव में इस रणनीति से भाजपा विपक्ष के पीडीए फॉर्मूले की काट निकालेगी।
Uttar Pradesh उपचुनाव में भाजपा की रणनीति

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भाजपा पार्टी की रणनीति के तहत सिर्फ एक सीट पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को भी मौका मिल सकता है। दिल्ली में हुई बैठक में भाजपा के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश संगठन की ओर से भेजे गए तीन-तीन नामों के पैनल में शामिल पिछड़े और दलित के नामों पर गंभीरता से विचार हुआ है। लोकसभा चुनाव में सीटें कम आने से जनता में फैले भ्रम को दूर करने के लिए भाजपा उपचुनाव के जरिये इंडिया गठबंधन को तगड़ी पटखनी देकर यह भ्रम मिटाना चाहती है।

पार्टी नेतृत्व की पूरी कोशिश है कि उपचुनाव में शत-प्रतिशत परिणाम भाजपा के ही पक्ष में आए। इसलिए पार्टी खास रणनीति बना रही है। इसके तहत सामान्य सीटों पर भी वहां के पिछड़ों व दलितों का दिल जीतने के लिए इसी वर्ग के लोगों को मैदान में उतारा जा सकता है। सूत्रों की माने तो विधानसभा चुनाव वाले राज्यों के लिए प्रत्याशी तय करने के लिए हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के उपचुनाव के लिए भी प्रत्याशियों के नाम की चर्चा हो चुकी है।

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में रणनीतिकारों ने भाजपा नेतृत्व को सपा के पीडीए फार्मूले की काट के लिए हर सीट के जातीय समीकरण को साधते हुए प्रत्याशी उतारने की सलाह दी है। इस सलाह के आधार पर ही पार्टी से प्रत्याशी तय किए जाएंगे। ऐसे में पिछड़ों-दलितों को ही ज्यादा मौका मिलने की संभावना है।