Uttar Pradesh Panchayat Chunaav File Photo
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तिथि आगे बढ़ा दी है। पहले यह सूची 15 जनवरी को जारी होनी थी, लेकिन अब नई तिथि 6 फरवरी 2025 तय की गई है। आयोग ने संशोधित कार्यक्रम जारी करते हुए दावे व आपत्तियों के निस्तारण की अवधि भी बढ़ा दी है।

क्यों बढ़ानी पड़ी तारीख? आयोग ने बताई वजह
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) पंचायत चुनाव के लिए तैयार की जा रही मतदाता सूची में बड़ा संशोधन कार्य चल रहा है। इस सूची में कुल 12.43 करोड़ मतदाता शामिल हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि इनमें से 90.76 लाख मतदाताओं के नाम दो या तीन बार दर्ज हो गए हैं।
एआई ने पकड़े 2.27 करोड़ डुप्लीकेट मतदाता
आयोग द्वारा प्रयोग किए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम ने अनुमान लगाया है कि लगभग 2.27 करोड़ मतदाता डुप्लीकेट रूप से सूची में शामिल हैं। यह बड़ी संख्या होने के कारण व्यापक सत्यापन की आवश्यकता पड़ी।
AI द्वारा चिन्हित इन नामों की जांच और सत्यापन के लिए उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के जिलों को निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसी दौरान विधानसभा और लोकसभा चुनावों की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन पर थी।
इस दोहरी व्यस्तता की वजह से पंचायत चुनाव मतदाता सूची का कार्य धीमा पड़ गया।
अब क्या होगा नया कार्यक्रम?
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य निर्वाचन आयोग ने संशोधित कार्यक्रम जारी करते हुए नई समय-सीमा तय कर दी है।
संशोधित तिथियाँ
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दावे व आपत्तियों का निस्तारण — 31 दिसंबर 2024 से 6 जनवरी 2025 तक
(पहली तिथि: 13 से 19 दिसंबर) -
मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन — 6 फरवरी 2025
(पहली तिथि: 15 जनवरी)
इस प्रकार पूरे कार्यक्रम को लगभग तीन सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया गया है ताकि जिलों को सूची की जांच, डुप्लीकेशन हटाने और अंतिम सत्यापन का पर्याप्त समय मिल सके।
डुप्लीकेट मतदाता: बड़ी चुनौती
डुप्लीकेट नाम हटाना उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार ग्राम पंचायत स्तर पर एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग वार्डों में दर्ज पाया जाता है। कुछ मामलों में पुराने रिकॉर्ड अपडेट न होने से भी त्रुटियाँ बनी रहती हैं।
इस बार आयोग ने तकनीक का उपयोग कर सभी जिलों को डुप्लीकेट सूची उपलब्ध कराई है, जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की जिला स्तर पर टीमें गांव-गांव जाकर सत्यापन कर रही हैं।
मतदाताओं से पहचान पत्र, आधार लिंकिंग, परिवार रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के आधार पर साक्ष्य लिए जा रहे हैं।
प्रशासनिक व्यस्तता भी बनी विलंब की वजह
अधिकारी बताते हैं कि नवंबर और दिसंबर में सार्वजनिक प्रतिनिधित्व से जुड़े अन्य बड़े अभियानों, जैसे—
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लोकसभा चुनाव का SIR,
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विधानसभा मतदाता सूची सुधार,
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गृह सर्वेक्षण,
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लिंकिंग एवं सत्यापन कार्य
—ने प्रशासन का समय और संसाधन काफी हद तक व्यस्त रखा।
इसी कारण उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) पंचायत चुनाव सूची का कार्य अपेक्षित गति से नहीं बढ़ सका।
ग्रामीण मतदाताओं में बढ़ी उत्सुकता
तिथि बढ़ने से भले ही प्रक्रिया लंबी हो गई हो, लेकिन मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन का ग्रामीण क्षेत्रों में बेकरारी से इंतजार है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत—ग्रामीण राजनीति का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक पर्व माना जाता है।
कई संभावित प्रत्याशी पहले ही अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो चुके हैं और मतदाता सूची को अंतिम रूप से देखने के बाद अपने क्षेत्र की चुनावी रणनीति तय करेंगे।
आयोग का दावा : ‘सटीक और त्रुटिरहित सूची’ ही लक्ष्य
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि पंचायत चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन में मतदाता सूची आधारभूत दस्तावेज होती है।
इसलिए जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि सटीक, त्रुटिरहित और पारदर्शी सूची प्रकाशित करना प्राथमिकता है।
अधिकारियों का कहना है कि फरवरी तक सभी जिलों में सत्यापन और नामों की शुद्धता का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद 6 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।