Uttar Pradesh SIR List 6 January Ko Hogi Jaari
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची की प्रक्रिया फिर से सुर्खियों में है। यह तीसरी बार है जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तारीख टली है। चुनाव आयोग ने अब इसे 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने की संभावना जताई जा रही है, जो राज्य के कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं का करीब 18-19 प्रतिशत है।

SIR प्रक्रिया और समय-सीमा में बदलाव
SIR अभियान की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष सत्यापन और सुधार करना है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में समय-सीमा में लगातार बदलाव हुए हैं:
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नामांकन की लास्ट डेट 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर की गई
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11 दिसंबर को अतिरिक्त दो सप्ताह का समय दिया गया, नई लास्ट डेट 26 दिसंबर 2025 तय की गई
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तीसरी बार देरी के कारण अब ड्राफ्ट मतदाता सूची 6 जनवरी 2026 को जारी होने की उम्मीद है
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार यूपी में सबसे अधिक वोटरों के नाम कटने की संभावना है। अन्य राज्यों में, तमिलनाडु में लगभग 15% और गुजरात में 14.5% वोटर डिलीशन की संभावना है।
नए पोलिंग बूथों के कारण देरी
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने बताया कि इस SIR अभियान के दौरान 15,030 नए पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।
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इन बूथों में वोटरों के नाम शिफ्ट किए जाएंगे
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नए पार्ट नंबर आवंटित किए जाएंगे
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BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की तैनाती की जाएगी
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नई मतदाता सूचियां इन नए बूथों पर उपलब्ध कराई जाएंगी
इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही ड्राफ्ट लिस्ट 6 जनवरी को जारी की जाएगी।
वोटिंग सेंटर का रेशनलाइजेशन
23 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) चुनाव आयोग ने वोटिंग सेंटर रेशनलाइजेशन का प्रस्ताव मंजूर किया।
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इससे पहले यूपी में कुल 1.62 लाख वोटिंग सेंटर थे
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15,030 नए सेंटर जोड़ने के बाद कुल संख्या 1.77 लाख हो गई
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नए सेंटर बनाने का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया और मतदाता सुविधा को बेहतर बनाना है
शहरी जिलों में सबसे ज्यादा वोटर डिलीशन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शहरी जिलों में सबसे अधिक वोटरों के नाम कटने की संभावना है। टॉप 10 जिले इस प्रकार हैं:
| जिला | अनुमानित नाम कटने वाले वोटर | प्रतिशत |
|---|---|---|
| लखनऊ | 12 लाख | 30% |
| प्रयागराज | 11.56 लाख | 24.64% |
| कानपुर नगर | 9 लाख | 25.5% |
| आगरा | 8.36 लाख | 23.25% |
| गाजियाबाद | 8.18 लाख | 28.83% |
| बरेली | 7.14 लाख | 20.99% |
| मेरठ | 6.65 लाख | 24.66% |
| गोरखपुर | 6.45 लाख | 17.61% |
| सीतापुर | 6.23 लाख | 19.55% |
बड़े शहरों पर असर और प्रशासनिक चर्चा
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़े शहरों और शहरी इलाकों में SIR प्रक्रिया का असर सबसे अधिक है।
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बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटने की संभावना
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ड्राफ्ट रोल में लगातार हो रही देरी
इन कारणों से SIR प्रक्रिया राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) चुनाव आयोग और प्रशासन इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं ताकि ड्राफ्ट मतदाता सूची समय पर प्रकाशित हो और आगामी चुनावों में मतदाता सुविधा प्रभावित न हो।