Magh Mele Me PAC Ne Pati-Patni Ko Doobne Se Bachaya (Ghazipur)
गाजीपुर (संवाददाता पवन मिश्रा) : गाजीपुर (Ghazipur) के प्रसिद्ध ददरीघाट पर रविवार को माघ महीने की पूर्णिमा तिथि के अवसर पर गंगा स्नान के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्नान के दौरान बड़ी बाग निवासी सुषमा ओझा और उनके पति अमर ओझा अचानक गहरे पानी में चले गए और दोनों एक साथ डूबने लगे। घाट पर तैनात 34वीं वाहिनी पीएसी भुल्लनपुर, वाराणसी की बाढ़ आपदा राहत टीम ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल रेस्क्यू कर दोनों पति-पत्नी की जान बचा ली।
इस घटना से कुछ देर के लिए घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और श्रद्धालुओं की सांसें थम सी गईं, लेकिन पीएसी जवानों की सूझबूझ और स्थानीय नाविकों व गोताखोरों की मदद से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

माघ पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
स्नान के दौरान फिसला पैर, गहरे पानी में चली गई महिला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर गाजीपुर (Ghazipur) के ददरीघाट पर हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान कर रहे थे। इसी दौरान स्नान करते वक्त सुषमा ओझा का पैर फिसल गया और वह अचानक गहरे पानी में चली गईं। पत्नी को डूबता देख उनके पति अमर ओझा ने बिना देर किए उन्हें बचाने के लिए गंगा में छलांग लगा दी।
हालांकि गंगा में तेज बहाव होने के कारण दोनों संतुलन खो बैठे और देखते ही देखते दोनों डूबने लगे। यह दृश्य देखकर घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया और चारों ओर चीख-पुकार शुरू हो गई।
पीएसी बाढ़ राहत टीम ने दिखाई बहादुरी
जवानों ने लगाई गंगा में छलांग
गाजीपुर (Ghazipur) की इस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर तैनात 34वीं बटालियन पीएसी की 13 सदस्यीय बाढ़ आपदा राहत टीम तुरंत हरकत में आ गई। टीम के जवान लाल यादव और सोनू कुमार वर्मा ने बिना समय गंवाए गंगा में छलांग लगाई। उनके साथ स्थानीय नाविक और गोताखोर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में कूद पड़े।
रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व प्लाटून कमांडर मुख्तार यादव कर रहे थे। इस दौरान हेड कांस्टेबल योगानंद मिश्रा, लांस नायक दिलीप कुमार सिंह सहित पूरी टीम ने आपसी समन्वय के साथ काम किया और कुछ ही मिनटों में दोनों पति-पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
श्रद्धालुओं से लगातार की जा रही थी अपील
गाजीपुर (Ghazipur) में पीएसी टीम द्वारा स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को लगातार गहरे पानी में न जाने की अपील की जा रही थी। जवानों ने लोगों से घाट की सीमाओं में रहकर स्नान करने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया।
रेस्क्यू के बाद घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने पीएसी जवानों की बहादुरी की सराहना की और “पीएसी जिंदाबाद” के नारे भी लगाए।
बचाए गए दंपती ने जताया आभार
‘समय पर मदद न मिलती तो अनहोनी हो सकती थी’
गाजीपुर (Ghazipur) में रेस्क्यू के बाद सुषमा ओझा भावुक हो गईं। उन्होंने पीएसी जवानों और स्थानीय गोताखोरों का धन्यवाद करते हुए कहा,
“अगर समय पर मदद नहीं मिलती तो आज कुछ भी हो सकता था। पीएसी जवान हमारे लिए भगवान बनकर आए।”
उनके पति अमर ओझा ने भी टीम का आभार व्यक्त किया और कहा कि प्रशासन की सतर्कता के कारण ही उनकी जान बच सकी।
सुरक्षा व्यवस्था बनी मिसाल
गाजीपुर (Ghazipur) की यह घटना माघ पूर्णिमा के गंगा स्नान के धार्मिक महत्व के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासन की सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता का भी जीवंत उदाहरण बनी। सच ही कहा गया है—
“जाके राखो साइयां, मार सके ना कोई।”
गाजीपुर (Ghazipur) प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से एक बड़ा हादसा टल गया और दो जिंदगियां सुरक्षित बचा ली गईं।