Phoolon Ki Kheti Se Badhi Kisaano Ki Income (Agra)
आगरा (Agra) : आगरा (Agra) के बाह क्षेत्र के किसान इन दिनों फूलों की खेती के जरिए मोटी कमाई कर रहे हैं। परंपरागत खेती छोड़कर ग्लेडियोलस के रंग-बिरंगे फूल उगाने वाले किसानों की आय लगातार बढ़ रही है। देशभर की मंडियों में इन फूलों की मांग इतनी बढ़ गई है कि एक पार्सल 35 से 40 हजार रुपये तक बिक रहा है। इस वजह से बाह के 60 से अधिक गांवों में करीब 600 एकड़ भूमि पर ग्लेडियोलस की खेती हो रही है।

ग्लेडियोलस की खेती से किसानों को तगड़ा मुनाफा
आगरा (Agra) जिले के बिजौली के किसान सोबरन सिंह और बरपुरा के किसान रामप्रकाश कुशवाह बताते हैं कि उन्होंने दो बीघा भूमि से फूलों की खेती शुरू की थी, लेकिन बढ़ती मांग और बेहतर मुनाफे के कारण आज 8 से 10 बीघा तक खेती कर रहे हैं। ग्लेडियोलस के फूल लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं—10 से 14 दिन तक। यही कारण है कि ये फूल मुंबई, दिल्ली, नोएडा, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों की मंडियों में आसानी से बिक जाते हैं।
आगरा (Agra) जिले के खेड़ा देवीदास के किसान प्रताप सिंह और क्वारी के सतेंद्र सिंह ने बताया कि ग्लेडियोलस के फूल 100 से 120 रुपये प्रति बंडल तक बिक रहे हैं। प्रति बीघा इनकी लागत करीब 25,000 रुपये आती है, जबकि पैदावार 1000 से 1200 बंडल तक होती है। इस तरह प्रति बीघा तीन गुना तक मुनाफा मिल जाता है। यह परंपरागत खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है।
ग्लेडियोलस: तलवार जैसी पत्तियों वाला आकर्षक फूल
ग्लेडियोलस फूल का नाम लैटिन भाषा के शब्द ‘ग्लेडियस’ से लिया गया है, जिसका मतलब होता है ‘तलवार’। इसके पौधों की लंबी, नुकीली पत्तियाँ तलवार जैसी दिखती हैं, इसलिए इसे लिली तलवार भी कहा जाता है। शानदार रंग, आकर्षक आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण इसे सजावट, इवेंट, गमलों और गुलदस्तों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। दिल्ली और मुंबई में होटलों व इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों में इनकी भारी मांग रहती है।
खेत से मंडी तक: पार्सल सिस्टम से होती है बिक्री
ग्लेडियोलस की 24 डंडियों से एक बंडल तैयार होता है। एक पार्सल में 50 से 60 बंडल लगाए जाते हैं। यही पार्सल दिल्ली, मुंबई और नोएडा की मंडियों में भेजे जाते हैं। मौजूदा समय में एक पार्सल की कीमत 35,000 से 40,000 रुपये तक मिल रही है। आगरा (Agra) के किसानों का कहना है कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार मांग और दाम दोनों ज्यादा बढ़े हैं।
खेती के साथ चारे की भी व्यवस्था
ग्लेडियोलस की खेती से किसानों को न सिर्फ आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि पशुओं के लिए चारे की भी व्यवस्था आसानी से हो जाती है। फूलों की कटिंग के दौरान निकलने वाले डंठल और पत्ते भैंस व बकरियों के अच्छे चारे के रूप में काम आते हैं। आगरा (Agra) किसानों के अनुसार, यह खेती बाजरा जैसी फसलों में हुए नुकसान की भरपाई कर देती है और चारे के संकट से छुटकारा भी दिला रही है।
इन गांवों में बड़े पैमाने पर हो रही खेती
आगरा (Agra) जिले के खेड़ा राठौर, बिजौली, मढ़ेपुरा, समोखीपुरा, बरकापुरा, क्वारी, सामरेमऊ, खेड़ा देवीदास, पहाड़पुरा, सन्नपुरा, तरासों, सहाबरायपुरा, क्यारी, रीछापुरा, रूपपुरा, हिंगोटखेड़ा, सीतापुर, रेंका, चांगोली, मझटीला, जैतपुर, मुढ़ियापुरा, पार्वतीपुरा, गुंगावली, भदरौली, चौंसिगी, रजपुरा, कनेंरा, डेरक और प्रतापपुरा सहित बाह क्षेत्र के 60 से अधिक गांव ग्लेडियोलस की खेती से जुड़े हैं।