Hathras Rain Basera
हाथरस (Hathras) (संवाददाता होमेश मिश्रा ) : जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री की कार्यकारी योजना मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर हाथरस (Hathras) जनपद में प्रशासन की एक कार्रवाई ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएड की परीक्षा देने आई छात्राओं को रेन बसेरा (आश्रय स्थल) से बाहर निकाल दिए जाने का मामला सामने आया है, जिससे छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

दूसरे जिलों से आई थीं बीएड परीक्षार्थी छात्राएं
हाथरस (Hathras) से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों से छात्राएं हाथरस के सिकंदराराऊ में आयोजित बीएड परीक्षा देने आई थीं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई छात्र-छात्राएं कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र स्थित अलीगढ़ रोड पर बने पंडित दीनदयाल अंत्योदय आश्रय स्थल (रेन बसेरा) में ठहरी हुई थीं। छात्राएं यहीं रहकर बीएड की परीक्षा दे रही थीं।
रेन बसेरा खाली कराने पर हुआ विवाद
आरोप है कि हाथरस (Hathras) प्रशासन द्वारा अचानक रेन बसेरा खाली कराने के निर्देश दिए गए। इस दौरान वहां रह रही छात्राओं को बाहर निकाल दिया गया। छात्राओं का कहना है कि वे कई दिनों से शांतिपूर्वक वहीं रहकर परीक्षा दे रही थीं, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बाहर कर दिया गया।
एसडीएम पर अभद्रता के गंभीर आरोप
छात्राओं ने आरोप लगाया है कि रेन बसेरा खाली कराने के दौरान संबंधित एसडीएम हाथरस (Hathras) द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने अपनी मजबूरी बताने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इस घटना से छात्राएं मानसिक रूप से आहत हैं।
होटल में भूखे-प्यासे गुजारनी पड़ी रात
रेन बसेरा से निकाले जाने के बाद करीब 34 छात्राओं को मजबूरी में एक होटल के केवल तीन कमरों में शरण लेनी पड़ी। छात्राओं का आरोप है कि उनके पास न तो पर्याप्त पैसे थे और न ही खाने-पीने की समुचित व्यवस्था। पूरी रात कई छात्राएं भूखी-प्यासे रहीं, जिससे उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी।
प्रशासन से मदद की गुहार
छात्राओं ने हाथरस (Hathras) जिला प्रशासन से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि परीक्षा के दौरान इस तरह की कार्रवाई से उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन उनके ठहरने की उचित व्यवस्था करे और जिम्मेदार अधिकारियों के व्यवहार की जांच कराई जाए।
प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल
हाथरस (Hathras) के इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि छात्राएं शांति से आश्रय स्थल में रह रही थीं, तो उन्हें परीक्षा अवधि तक वहां रहने दिया जाना चाहिए था या फिर पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
फिलहाल छात्राएं न्याय और सहायता की आस में हाथरस (Hathras) जिला प्रशासन की ओर देख रही हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और छात्राओं को राहत मिलती है या नहीं।