File Photo Court (Sambhal)
सम्भल (संवाददाता महबूब अली) : सम्भल (Sambhal) कोर्ट परिसर में हाल ही में सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) के ट्रांसफर को लेकर हुए वकीलों के प्रदर्शन की असलियत अब सामने आ गई है। दो दिन पहले जिस प्रदर्शन को वकीलों का सामूहिक आक्रोश बताया जा रहा था, उसे अब सम्भल के सीनियर अधिवक्ताओं ने गैरकानूनी और भ्रामक करार दिया है। वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि इस प्रदर्शन से बार एसोसिएशन का कोई लेना-देना नहीं था और इसमें केवल चंद वकील ही शामिल थे।

बार की अनुमति के बिना हुआ प्रदर्शन: सीनियर अधिवक्ता
सम्भल (Sambhal) के हरिमंदिर–जामा मस्जिद प्रकरण में नियुक्त कोर्ट कमिश्नर और सीनियर अधिवक्ता ने इस मामले में स्थिति साफ करते हुए कहा कि प्रदर्शन के लिए बार एसोसिएशन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसे वकीलों का सामूहिक आंदोलन बताना पूरी तरह गलत और गुमराह करने वाला है।
सीनियर वकील के अनुसार,
“बार के अधिकांश अधिवक्ता इस प्रदर्शन से अलग रहे। कुछ चुनिंदा वकीलों ने अपने निजी और राजनीतिक एजेंडे के तहत इसे आयोजित किया, जिसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाना था।”
राजनीतिक दलों की भूमिका का भी आरोप
सम्भल (Sambhal) के सीनियर अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन के पीछे विपक्षी राजनीतिक दलों की भूमिका रही है। उनका कहना है कि न्यायालय परिसर को राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की गई, जो न सिर्फ अनुचित है बल्कि न्यायिक मर्यादाओं के भी खिलाफ है।
वकीलों का कहना है कि कोर्ट परिसर में किसी भी प्रकार का प्रदर्शन बार की अनुमति और नियमों के तहत ही किया जा सकता है। इसके विपरीत किया गया प्रदर्शन नियम विरुद्ध है।
सीजेएम का ट्रांसफर पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया: ASI के अधिवक्ता
‘ट्रांसफर को किसी प्रकरण से जोड़ना निराधार’
इसी प्रकरण में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधिवक्ता ने भी सीजेएम ट्रांसफर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा कि यह तबादला हाईकोर्ट की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।
एएसआई के अधिवक्ता ने कहा,
“न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण एक सामान्य प्रक्रिया है। इसे किसी विशेष आदेश, दबाव या मामले से जोड़ना पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।”
उन्होंने साफ किया कि सम्भल (Sambhal) सीजेएम के तबादले का हरिमंदिर–जामा मस्जिद प्रकरण से कोई संबंध नहीं है।
हाईकोर्ट ने की नई नियुक्ति, पुराने सीजेएम की वापसी
गौरतलब है कि प्रदर्शन के अगले ही दिन हाईकोर्ट के प्रशासनिक अनुभाग ने दीपक कुमार जायसवाल को सम्भल (Sambhal) का नया सीजेएम नियुक्त कर दिया। वहीं, पहले सीजेएम बनाए गए आदित्य सिंह को उनके पुराने पद सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पर वापस तैनात कर दिया गया।
इस प्रशासनिक निर्णय के बाद जिस तरह यह मामला प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सुर्खियों में रहा, अब सीनियर वकीलों के बयानों से उसकी वास्तविकता सामने आती दिख रही है।
अब बड़ा सवाल—आखिर किसने और क्यों खड़ा किया बखेड़ा?
सीनियर वकीलों के खुलासे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि सम्भल (Sambhal) में सीजेएम ट्रांसफर के विरोध की आड़ में आखिर किसने और किस उद्देश्य से कोर्ट परिसर में यह पूरा विवाद खड़ा किया। क्या यह महज प्रशासनिक निर्णय को मुद्दा बनाकर न्यायिक व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश थी, या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक मकसद छिपा है—इस पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।