File Photo (Uttar Pradesh)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को समय से उन्नत बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एक अहम पहल की है। अब प्रदेश की महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) भी बीज गन्ना उत्पादन की प्रक्रिया में भागीदार बनेंगी। इसके लिए गन्ना विकास विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह समझौता सोमवार को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की उपस्थिति में आयोजित कोर ग्रुप की पहली बैठक के दौरान संपन्न हुआ।

महिलाओं को मिलेगा रोजगार, किसानों को बेहतर बीज
इस एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विभिन्न जिलों में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों को बीज गन्ना उत्पादन, नर्सरी विकास, बीज प्रसंस्करण और आपूर्ति जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इससे एक ओर जहां ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर गन्ना किसानों को रोग प्रतिरोधक और उच्च उत्पादकता वाला बीज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।
सरकार का उद्देश्य है कि बीज गन्ना उत्पादन को विकेंद्रीकृत कर लागत कम की जाए और किसानों की निर्भरता बाहरी स्रोतों पर घटे।
टिश्यू कल्चर तकनीक को बढ़ावा देने के लिए दूसरा समझौता
बैठक के दौरान टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से उन्नत बीज उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए बलरामपुर चीनी मिल और उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के बीच भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के जरिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से शुद्ध, एकरूप और उच्च गुणवत्ता वाले बीज गन्ने का उत्पादन किया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में गन्ने की उपज और चीनी रिकवरी में सुधार आने की संभावना है।
पुरानी किस्मों को बदलने पर जोर
डालीबाग स्थित लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान में आयोजित बैठक में मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उच्च उत्पादकता, रोग प्रतिरोधक और गुणवत्तायुक्त गन्ना प्रजातियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पुरानी और कम उत्पादन देने वाली किस्मों को चरणबद्ध तरीके से प्रतिस्थापित किया जाए। साथ ही गन्ना किसानों को समय से और पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध कराया जाना बेहद जरूरी है।
पेराई सत्र के आंकड़ों के आधार पर बनेगी कार्ययोजना
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान पेराई सत्र के आंकड़ों के आधार पर त्वरित आच्छादन, गन्ना किस्म विस्थापन, गन्ना उत्पादकता में वृद्धि और पेड़ी प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए स्थलीय कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि किए गए समझौतों से न केवल बेहतर बीज का उत्पादन होगा, बल्कि उसे किसानों तक सुलभ और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
यंत्रीकरण पर भी हुई चर्चा
बैठक में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गन्ना हार्वेस्टर मशीन निर्माताओं द्वारा भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से श्रम लागत कम करने और कटाई प्रक्रिया को तेज व प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. सहित गन्ना विकास विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।