DM Shamli Ko Shikayati Patra Dene Pahunche Congress Karyakarta
शामली संवाददाता (दीपक राठी) : उत्तर प्रदेश के जनपद शामली (Shamli) में कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मत्स्य विभाग के तालाब से करोड़ों रुपए की मिट्टी के अवैध खनन का मामला राज्यपाल तक पहुंचाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महामहिम राज्यपाल के नाम जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और संलिप्त अधिकारियों एवं कंपनी पर कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेसियों का आरोप – प्रशासनिक अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत
शामली (Shamli) से सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वाधान में करीब दर्जनभर पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि थाना कैराना क्षेत्र के गांव जगनपुर में मत्स्य विभाग के अधीन तालाब से अवैध खनन किया जा रहा है।
कांग्रेसियों का आरोप है कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने जीआर इंफ्रा प्रो लि नामक कंपनी के साथ सांठगांठ की और तालाब से करोड़ों रुपए की मिट्टी का खनन किया। आरोप है कि यह खनन अमृत भारत सरोवर योजना के तहत कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अंजाम दिया गया।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत से यह घोटाला किया गया और अब प्रशासनिक अधिकारी कंपनी का लगातार बचाव कर रहे हैं। यही नहीं, इस घोटाले के चलते राजस्व को भी करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।
कांग्रेस की मांग और चेतावनी
शामली (Shamli) से कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
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तालाब से अवैध खनन और घोटाले में शामिल अधिकारियों और जीआर इंफ्रा प्रो लि कंपनी पर कड़ी कार्रवाई।
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अवैध खनन से हुई राजस्व हानि की भरपाई संलिप्त अधिकारियों और कंपनी से कराई जाए।
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मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कर घोटाले की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे जनांदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
तालाब और घोटाले की पृष्ठभूमि
शामली (Shamli) से मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाद मत्स्य विभाग के तालाब को लेकर है। तालाब का इस्तेमाल अमृत भारत सरोवर योजना के तहत किया जाता है। आरोप है कि तालाब से अवैध रूप से मिट्टी निकाली गई और इसे कंपनी के जरिए बेचा गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत के कारण तालाब और आसपास की संवैधानिक संस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में यह मामला न केवल राजस्व की हानि का है, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी नियमों की अवहेलना का भी उदाहरण है।
शामली (Shamli) में तालाब से अवैध खनन का यह मामला प्रशासन और सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। कांग्रेस नेताओं की ओर से राज्यपाल तक ज्ञापन भेजना इस मुद्दे की संवेदनशीलता को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से जांच और कार्यवाही करते हैं।