Pidit Ke Sath Dhakka-Mukki Karte Policekarmi (Kasganj)
कासगंज (संवाददाता जयचंद्र) : उत्तर प्रदेश के जनपद कासगंज (Kasganj) में प्रशासनिक जनसुनवाई के दौरान पुलिस की कथित अमानवीय और तानाशाही कार्यशैली सामने आने का आरोप लगा है। सदर तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस के अवसर पर अलीगढ़ मंडल की कमिश्नर संगीता सिंह की जनसुनवाई चल रही थी। इसी दौरान गुरुकुल विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचे एक पीड़ित को पुलिस ने कथित रूप से न केवल जनसुनवाई में जाने से रोका, बल्कि धक्का-मुक्की कर घसीटते हुए तहसील परिसर से बाहर ले गई और बाद में हवालात में बंद कर दिया।
पीड़ित ने पुलिस पर गला दबाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया है।

पीड़ित की पहचान और जमीन विवाद का मामला
पीड़ित की पहचान संतोष गौड़, निवासी मोहल्ला जय जय राम, थाना कासगंज (Kasganj) सदर कोतवाली क्षेत्र के रूप में हुई है। पीड़ित का कहना है कि सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पहाड़पुर माफी स्थित गाटा संख्या 215/210 स की भूमि उसके नाम विधिवत दर्ज है। इसी भूमि पर वह गुरुकुल विद्यालय खोलना चाहता है।
संतोष गौड़ का आरोप है कि उसकी जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें एक भाजपा नेता बॉबी कश्यप और एसडीएम सदर संजीव कुमार की कथित मिलीभगत है।
पहले भी की जा चुकी हैं शिकायतें
पीड़ित का दावा है कि कासगंज (Kasganj) के इस पूरे मामले को लेकर वह पहले ही आईजीआरएस (मुख्यमंत्री पोर्टल) और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री जनता दरबार में शिकायत दर्ज करा चुका है, लेकिन अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिली।
इसी क्रम में वह शनिवार को कमिश्नर संगीता सिंह की जनसुनवाई में अपनी शिकायत रखने पहुंचा था, ताकि उसे न्याय मिल सके।
पोस्टर लेकर पहुंचा था पीड़ित, पुलिस ने रोका
पीड़ित के अनुसार, जब वह कासगंज (Kasganj) एसडीएम सदर की कथित भूमिका को लेकर पोस्टर के माध्यम से अपनी बात रखने की कोशिश कर रहा था, तभी वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया। संतोष गौड़ का आरोप है कि पुलिस ने बिना कोई कारण बताए उसके साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
पीड़ित का कहना है कि उसे घसीटते हुए तहसील परिसर से बाहर ले जाया गया, जबरन एक वाहन में बैठाया गया और सदर कोतवाली ले जाकर हवालात में बंद कर दिया गया।
गला दबाने और अपराधी जैसा व्यवहार करने का आरोप
संतोष गौड़ ने आरोप लगाया कि इस दौरान कासगंज (Kasganj) पुलिसकर्मियों ने उसका गला दबाया और उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया, जबकि वह केवल अपने कानूनी हक और जमीन बचाने की आवाज उठा रहा था।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जनसुनवाई जैसे मंच पर ही फरियादी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद कहां से करे।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उसने दोषी पुलिसकर्मियों और कथित रूप से शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।
फिलहाल कासगंज (Kasganj) प्रशासन या पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला सामने आने के बाद जिला स्तर पर हलचल तेज हो गई है।