SIR List Me Gadbadi Par Samajwadi Party Ne Lagaye Aarop (Muzaffarnagar)
मुजफ्फरनगर (संवाददाता विराट मालिक ) : मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष शमशेर मलिक ने स्थानीय निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BLO (Booth Level Officer) द्वारा उपलब्ध कराई गई SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण) में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे आम नागरिकों के मताधिकार पर सीधे खतरा उत्पन्न हुआ है।

मुख्य आरोप और विसंगतियां
मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) से शमशेर मलिक ने विशेष रूप से तीन प्रमुख विसंगतियों का हवाला दिया:
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जीवित मतदाताओं को मृत दिखाया गया:
बूथ संख्या 73 (विधानसभा पुरकाजी) पर कई ऐसे मतदाता जिनकी स्वास्थ्य स्थिति पूरी तरह ठीक है, उन्हें कागजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया। -
रसीद होने के बावजूद नाम काटा गया:
दर्जनों मतदाताओं ने SIR फॉर्म जमा किया था और उनके पास विभाग की आधिकारिक रिसीविंग पर्ची भी मौजूद थी। इसके बावजूद, उनके नाम सूची से काटे गए और उन्हें ‘अनुपस्थित’ दिखाकर उनके मताधिकार को छीना गया। -
PDA समाज को निशाना बनाने की साजिश:
शमशेर मलिक ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि चुन-चुन कर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समाज के वोट काटे जा रहे हैं, ताकि आगामी चुनावों में विशेष वर्ग को लाभ पहुंचे।

शमशेर मलिक का बयान
मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) से शमशेर मलिक ने कहा:
“यह लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास है। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर गरीबों और वंचितों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। हमारे पास मतदाताओं की रसीदें और उनके जीवित होने के प्रमाण मौजूद हैं। अगर मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) जिला प्रशासन और चुनाव आयोग ने जल्द ही इन फर्जी कटौतियों को ठीक नहीं किया और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।”
उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी (DM) से मांग की कि पूरे प्रकरण की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन पात्र मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से कटे हैं, उन्हें ससम्मान सूची में वापस जोड़ा जाए।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) से शमशेर मलिक के आरोपों से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं और यह मुद्दा स्थानीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है। अगर आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह मतदाता विश्वास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए गंभीर चुनौती होगा।