Shamli File Photo
शामली संवाददाता (दीपक राठी) : उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ योगी सरकार की सख्त नीति के दावे लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन जनपद शामली (Shamli) में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शामली में वक्फ बोर्ड द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर न केवल निर्माण कराया गया, बल्कि उस जमीन को किराए पर देकर लाखों रुपये महीना वसूले जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के दो हफ्ते बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

16 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, किराए से हो रही लाखों की कमाई
पूरा मामला शामली (Shamli) सदर कोतवाली क्षेत्र के सिटी स्थित तैमूर शाह कॉलोनी से जुड़ा है। तैमूर शाह कॉलोनी निवासी हारून ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि दिल्ली रोड स्थित तैमूर शाह कॉलोनी करीब 16 बीघा सरकारी भूमि पर विकसित की गई है। इस जमीन पर वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जा किया गया है और कब्जे के बाद अन्य लोगों को दुकानें व भवन किराए पर देकर लाखों रुपये प्रति माह का किराया वसूला जा रहा है।
पीड़ित का दावा है कि यह पूरी भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, बावजूद इसके वर्षों से यहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
जिलाधिकारी ने सौंपी जांच, लेकिन नतीजा शून्य
हारून द्वारा दी गई शिकायत पर जिलाधिकारी शामली (Shamli) ने संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शामली एसडीएम को सौंपी थी। हालांकि, शिकायत दिए जाने के दो हफ्ते से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक न तो कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही मौके पर किसी तरह की प्रभावी कार्रवाई देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे अवैध कब्जेदारों के हौसले बुलंद हैं।
संभल में बुलडोजर, शामली में खामोशी क्यों?
इस पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में लाने वाली बात यह है कि शामली (Shamli) से कुछ ही दूरी पर स्थित संभल जनपद में हाल ही में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद और मदरसे को प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। वहां योगी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति साफ तौर पर नजर आई।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब संभल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ तुरंत बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है, तो शामली में वक्फ बोर्ड द्वारा कथित कब्जे पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जमीन की कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये बताई जा रही
शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस जमीन पर कब्जे का आरोप है, उसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इतने बड़े भू-भाग पर अवैध कब्जा और उससे होने वाली आर्थिक कमाई शामली (Shamli) प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लोगों का कहना है कि यदि यही मामला किसी आम व्यक्ति या छोटे समूह से जुड़ा होता, तो अब तक बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी होती।
प्रशासनिक लापरवाही या दबाव? उठ रहे कई सवाल
शामली (Shamli) के इस पूरे प्रकरण में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई में देरी को लेकर लोग प्रशासनिक लापरवाही या किसी तरह के दबाव की आशंका जता रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या शामली (Shamli) में भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर बुलडोजर चलेगा?
या फिर यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
शामली (Shamli) में वक्फ बोर्ड पर सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप और प्रशासन की धीमी कार्रवाई ने कानून की समानता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन इस मामले में सख्त रुख अपनाता है या फिर यह मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है। जनता की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।