रूस में शामली-मुजफ्फरनगर के तीन छात्र लापता, 43 दिन से नहीं मिला सुराग; परिजनों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
शामली/मुजफ्फरनगर। रूस में पढ़ाई करने गए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन युवकों के अचानक लापता होने से उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। तीनों युवक पिछले 43 दिनों से अपने परिजनों के संपर्क में नहीं हैं। परिवारों को अब तक उनके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।
लापता युवकों में शामली के हसनपुर लुहारी निवासी आशु सैनी के अलावा मुजफ्फरनगर के गांव बाढ़ निवासी हिमांशु शर्मा और पीपलशाह निवासी शक्ति पुंडीर शामिल हैं। तीनों रूस की मॉस्को स्टेट लिंग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गए थे।
30 जुलाई की रात हुई थी आखिरी बातचीत
परिजनों के मुताबिक, 30 जुलाई की रात करीब 10:32 से 10:40 बजे के बीच तीनों युवकों से फोन पर बातचीत हुई थी। उस समय तक सब कुछ सामान्य था। बातचीत खत्म होने के बाद परिवारों को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनके बच्चों से आखिरी बातचीत साबित होगी।
इसके बाद तीनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। परिजनों ने लगातार फोन और दूसरे माध्यमों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
घर में चिंता का माहौल, हर जानकारी का इंतजार
कई दिनों से बच्चों की खबर नहीं मिलने के कारण परिवारों में बेचैनी का माहौल है। परिजन लगातार इस उम्मीद में हैं कि रूस से उनके बच्चों के बारे में कोई सकारात्मक जानकारी सामने आएगी।
परिवारों का कहना है कि पढ़ाई के लिए विदेश भेजे गए बच्चों से अचानक संपर्क टूट जाना बेहद चिंताजनक है। ऐसे में उनकी सबसे बड़ी मांग है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए युवकों की तलाश तेज कराएं।
एजेंट के जरिए रूस भेजने की बात
परिजनों के अनुसार, तीनों युवकों को हाइपर वीजा के संचालक आकाश भारद्वाज के माध्यम से स्टडी वीजा पर रूस भेजा गया था। परिवारों का दावा है कि इसके लिए करीब 3.70 लाख रुपये लिए गए थे।
युवकों के लापता होने के बाद परिजनों ने एजेंट से भी संपर्क कर जानकारी हासिल करने की कोशिश की। परिवारों का आरोप है कि शुरुआती दौर में उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली और बाद में एजेंट ने फोन उठाना भी बंद कर दिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार से लगाई बच्चों को तलाशने की गुहार
अब तीनों परिवार सरकार और संबंधित अधिकारियों से मदद की मांग कर रहे हैं। परिजनों की अपील है कि रूस में भारतीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर संपर्क कर युवकों का जल्द पता लगाया जाए।
परिवारों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की अफवाह या अनुमान नहीं, बल्कि अपने बच्चों की सुरक्षित होने की पुख्ता जानकारी चाहिए। तीनों परिवारों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करेगी और युवकों को खोजने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।