Shamli Jila Asptaal Me Dhool Fank Raha ICU Ward
शामली संवाददाता (दीपक राठी) : उत्तर प्रदेश के जनपद शामली (Shamli) के जिला संयुक्त चिकित्सालय में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए आईसीयू वार्ड, बर्न यूनिट और ब्लड बैंक महज शोपीस बनकर रह गए हैं। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए तैयार की गई अत्याधुनिक सुविधाएं स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। हालत यह है कि वार्डों के बाहर ताले लटके हैं और अंदर लगी आधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। इसका सीधा असर जिले के गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरन दूसरे शहरों में रेफर किया जा रहा है।

करोड़ों की लागत, लेकिन सुविधा शून्य
शामली (Shamli) जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड पूरी तरह तैयार है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां करीब 28 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, जो पूरी तरह क्रियाशील अवस्था में हैं। हाल ही में छह स्वास्थ्यकर्मी ट्रेनिंग लेकर भी लौटे हैं। इसके बावजूद वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर और एनेस्थेटिस्ट की नियुक्ति न होने से सुविधा शुरू नहीं हो पा रही है।
बर्न यूनिट भी बनकर तैयार है, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में उसका संचालन नहीं हो पा रहा। हालांकि अस्पताल में मौजूद सर्जन डॉक्टरों द्वारा जले हुए मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है, लेकिन गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
ब्लड बैंक अब भी ‘अंडर प्रोसेस’
शामली (Shamli) अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ब्लड बैंक की स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। फिलहाल मामला प्रक्रिया में है, जिसके चलते मरीजों को ब्लड के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
सीएमएस ने क्या कहा?
जब इस संबंध में शामली (Shamli) जिला अस्पताल के सीएमएस से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि आईसीयू पूरी तरह तैयार है और मशीनें भी काम करने की स्थिति में हैं, लेकिन वेंटिलेटर ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं हैं। साथ ही अस्पताल में एनेस्थेटिस्ट की भी पोस्टिंग नहीं है।
उन्होंने बताया कि 5-6 बार शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है कि शामली (Shamli) अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट की कमी है। यहां तक कि स्त्री रोग विशेषज्ञ भी ऑन कॉल ही आती हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मरीजों को हो रही भारी परेशानी
गंभीर मरीजों को शामली (Shamli) जिला अस्पताल में आईसीयू सुविधा न मिलने के कारण मेरठ, मुजफ्फरनगर या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
दूसरी ओर, निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर और आईसीयू के नाम पर प्रतिदिन हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। सरकारी अस्पताल में सुविधा होने के बावजूद उसका लाभ न मिल पाना कहीं न कहीं सरकारी योजनाओं और मंशाओं पर सवाल खड़े करता है।
सरकार के आदेशों पर उठे सवाल
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी अस्पतालों से कोई भी मरीज निराश होकर न लौटे। लेकिन शामली (Shamli) जिला अस्पताल की स्थिति इन आदेशों की जमीनी हकीकत को बयां कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सुविधाएं बंद पड़ी रहें, तो यह न केवल संसाधनों की बर्बादी है बल्कि आम जनता के साथ अन्याय भी है।
कब बदलेगी तस्वीर?
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक शामली (Shamli) का जिला अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ से लैस होगा? कब तक मरीजों को रेफर होकर दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ेगी? और कब तक करोड़ों की मशीनें यूं ही धूल खाती रहेंगी?
जनता को इंतजार है कि शासन स्तर पर जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शामली (Shamli) जिला अस्पताल वास्तव में गंभीर मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो सके।