Demand for increase in sugarcane price intensifies in UP
Source : राहुल राणा (News 80)
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों को गन्ने के भाव (sugarcane price) की चिंता सताने लगी है। किसान संगठनों से लेकर बड़े नेताओं तक ने सरकार को चेतावनी देना शुरू कर दिया है कि अगर इस बार गन्ने का भाव नहीं बढ़ाया गया तो इसका असर आने वाले चुनावों पर साफ देखने को मिलेगा।
किसान नेता नरेश टिकैत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले जनता से वादा किया था कि गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति कुंतल किया जाएगा। यह वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान किया था। लेकिन सत्ता में आए अब करीब 11 साल हो चुके हैं और आज भी किसानों को गन्ने का भाव (sugarcane price) 450 रुपये नहीं मिल पाया है।
महंगाई दोगुनी, लेकिन गन्ने का भाव वही
किसानों का कहना है कि पिछले 10 सालों में महंगाई दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। खाद, बीज, डीजल और कीटनाशक तक महंगे हो चुके हैं, लेकिन गन्ने का भाव महज 370 रुपये प्रति कुंतल तक ही सीमित है। किसानों का तर्क है कि जब आम जनता की जेब पर महंगाई का असर पड़ा है, तो खेती की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में गन्ने का दाम बढ़ाना बेहद जरूरी है।

रालोद पर भी दबाव (sugarcane price)
गन्ने के मुद्दे पर बीजेपी की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) पर भी दबाव बढ़ गया है। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसानों को भरोसा दिलाया था कि गन्ने का भाव 400 रुपये से ऊपर जाएगा। लेकिन मौजूदा हालात में गन्ने का दाम अब भी 370 रुपये ही है। किसानों का मानना है कि रालोद को अपने वादे पर कायम रहना चाहिए और केंद्र व राज्य सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
चुनावी असर की चेतावनी
किसानों ने साफ कहा है कि अगर इस बार भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा। पश्चिम यूपी के गन्ना बेल्ट में किसानों की नाराजगी का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि किसान संगठन सरकार को बार-बार उसके वादे की याद दिला रहे हैं।
किसानों की मांग
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गन्ने का भाव कम से कम 450 रुपये प्रति कुंतल किया जाए।
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खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद-बीज और डीजल पर सब्सिडी बढ़ाई जाए।
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बकाया भुगतान समय पर कराया जाए।
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पेराई सत्र से पहले गन्ने के नए रेट घोषित किए जाएं।
टिकैत की चेतावनी
नरेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की बात नहीं मानी तो यह आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने कहा कि गन्ना बेल्ट में किसान अब जागरूक हो चुके हैं और कोई भी राजनीतिक दल उनके साथ छल करेगा तो उन्हें आने वाले चुनाव में जवाब मिलेगा। (sugarcane price)
गन्ना किसानों की मांगों को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्म होती दिख रही है। एक ओर किसान संगठनों का दबाव है, तो दूसरी ओर चुनावी समीकरण भी दांव पर लगे हैं। ऐसे में देखना होगा कि योगी सरकार और केंद्र सरकार किसानों की मांग पर क्या फैसला लेती है।