Sambhal Ki Kaarigari Ki Videsho Tak Goonj
सम्भल (संवाददाता महबूब अली) : उत्तर प्रदेश के सम्भल (Sambhal) जनपद की पारंपरिक हॉर्न एंड बोन कारीगरी आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। थाना हयातनगर क्षेत्र के रसूलपुर धतरा स्थित ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ (CFC) में तैयार हो रहे हॉर्न और बोन से बने बटन अब देश ही नहीं, बल्कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों तक निर्यात हो रहे हैं।

आठ मशीनों से गुजरकर तैयार होता है एक बटन
सम्भल (Sambhal) के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में कार्यरत कारीगर बबलू अहमद बताते हैं कि यहां कच्ची हड्डी से लेकर फिनिश्ड बटन तक की पूरी प्रक्रिया आधुनिक मशीनों के माध्यम से की जाती है।
-
बटन निर्माण की प्रक्रिया 8 अलग-अलग मशीनों से होकर गुजरती है
-
इसमें डिज़ाइनिंग, शेपिंग और फिनिशिंग शामिल है
-
प्रतिदिन मशीनों की क्षमता के अनुसार 80 से 90 हजार बटन तैयार किए जा सकते हैं
-
उत्पादन पूरी तरह ऑर्डर पर निर्भर करता है
फिलहाल बटनों की डिमांड “ठीक-ठाक” बनी हुई है और अधिकांश ऑर्डर विदेशों से मिल रहे हैं।

महिलाओं की भी अहम भागीदारी
कारखाने में कार्यरत महिला कर्मचारी वीरवती बताती हैं कि महिलाएं न सिर्फ मशीनों पर बटन बनाती हैं, बल्कि उनकी छंटाई और फिनिशिंग का जिम्मा भी संभालती हैं।
उन्होंने कहा कि सम्भल (Sambhal) में बने उत्पादों का विदेशों तक जाना गर्व की बात है। वर्तमान में इस यूनिट में 5 से 6 लोग कार्यरत हैं।
ODOP योजना से बदली उद्योग की दिशा
ODOP (One District One Product) योजना के तहत हॉर्न एंड बोन इंडस्ट्री को नई पहचान मिली है। इस संबंध में जानकारी देते हुए कमल कौशल ने बताया कि वर्ष 2018 में इस उत्पाद को ODOP में शामिल किए जाने के बाद उद्योग में तेज़ी से विकास हुआ।
-
सरकार ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा उपलब्ध कराई
-
सम्भल (Sambhal) के उत्पादों को दो GI टैग मिले
-
पहले लुप्तप्राय मानी जाने वाली कला अब रोज़गार का मजबूत जरिया बन चुकी है
ODOP से पहले उद्योग का सालाना टर्नओवर लगभग 100–150 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब सम्भल से सीधा निर्यात किया जा रहा है।
बटन के अलावा भी कई उत्पादों की मांग
सम्भल (Sambhal) में केवल बटन ही नहीं, बल्कि—
-
सींग से बने चश्मे
-
सीटी
-
आर्टिफिशियल ज्वेलरी
-
सजावटी वस्तुएं (फोटो फ्रेम, ट्रे, नेपकिन होल्डर, कैंडल होल्डर)
भी तैयार किए जाते हैं, जिनकी विदेशों में अच्छी मांग है।
स्थानीय हुनर और आधुनिक तकनीक का संगम
पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक के मेल ने सम्भल (Sambhal) को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है। स्थानीय कारीगरों की मेहनत और प्रशासनिक सहयोग ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
सम्भल की यह सफलता कहानी न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक बन रही है।