Jama Masjid Par Rajesh Singhal Ka Vivadit Bayaan (Sambhal)
सम्भल (संवाददाता महबूब अली) : उत्तर प्रदेश के सम्भल (Sambhal) जिले में एक धार्मिक आयोजन के दौरान दिया गया विवादित बयान राजनीतिक और सामाजिक हलचलों को तेज कर गया है। कैलादेवी धाम में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने मंच से ऐसा भाषण दिया, जिसने पूरे जिले में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। उन्होंने सम्भल की जामा मस्जिद को लेकर अयोध्या आंदोलन जैसी “चढ़ाई” की चेतावनी दी, जिसे लेकर कई संगठनों और विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर समाज को बांटने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश बताया है।

धार्मिक मंच से भड़काऊ बयान—“जामा मस्जिद की एक-एक ईंट उखाड़ लेंगे”
सम्भल (Sambhal) कैलादेवी धाम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इसी दौरान अपने विवादित संबोधन में राजेश सिंघल ने कहा कि यह “पहली लड़ाई” है और पहली बार इतनी बड़ी संख्या में भीड़ जुटी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सम्भल में भी “अयोध्या जैसा आंदोलन” देखने को मिलेगा।
सम्भल (Sambhal) से उन्होंने खुले मंच से कहा कि यात्रा की शुरुआत फिलहाल कैलादेवी धाम से हुई है, लेकिन भविष्य में सम्भल के हजारों गांवों से लोग चारों ओर से निकलेंगे और “जामा मस्जिद की एक-एक ईंट उखाड़ ले जाएंगे।” उनके इस बयान से उपस्थित भीड़ में उत्साह देखा गया, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही कई लोग इसे खुले तौर पर नफरत भड़काने वाला भाषण बता रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्यायालय और सरकार ने हरिहर मंदिर का “कब्ज़ा” उन्हें नहीं दिलाया, तो हालात अयोध्या आंदोलन जैसे हो सकते हैं। उन्होंने इसे “सोए हुए हिंदू समाज को जगाने की मुहिम” बताया और कहा कि साधु-संतों के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन भी छेड़ा जा सकता है।
कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति—“न्यायपालिका और संविधान को चुनौती देना गलत”
सम्भल (Sambhal) में विवाद बढ़ते ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष आरिफ तुर्की ने राजेश सिंघल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक पदाधिकारी द्वारा मंच से इस तरह की आग उगलने वाली भाषा का इस्तेमाल बेहद गैर-जिम्मेदाराना है और यह देशहित के खिलाफ है।
सम्भल (Sambhal) से तुर्की ने कहा, “देश संविधान से चलता है, और सभी नागरिकों को संविधान तथा न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। लेकिन जिस तरह उन्होंने अपने भाषण में न्यायपालिका को भी दरकिनार कर अयोध्या जैसे हालात पैदा करने की चेतावनी दी है, वह बिल्कुल अस्वीकार्य है।”
उन्होंने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की और कहा कि ऐसे बयान समाज में अनावश्यक तनाव फैलाने वाले हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को इस तरह के उकसावे वाले भाषणों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि माहौल न बिगड़े।
क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल, प्रशासन सतर्क
सम्भल (Sambhal) का विवादित बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल होने के बाद सम्भल जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। स्थानीय संगठनों और सामाजिक नेताओं ने भी इस तरह के बयान को संवेदनशील वातावरण से खिलवाड़ बताया है।
सम्भल (Sambhal) पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले पर नज़र बनाए हुए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी किसी कार्रवाई की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां ऐसे बयानों की संवेदनशीलता को देखते हुए अलर्ट मोड पर हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों में चिंता है कि ऐसे बयान साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई लोगों ने मांग की है कि प्रशासन विवादित बयान देने वाले पर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनी रहे।