Nahar Ki Patri Tootne Se Hazaaro Bigha Fasal Barbad (Bijnor)
बिजनौर (संवाददाता महेंद्र सिंह) : बिजनौर (Bijnor) जनपद में सुल्तानपुर रजवाहा नहर की पटरी टूटने से बड़ा कृषि संकट खड़ा हो गया है। नहर की पटरी टूटते ही तेज बहाव के साथ पानी खेतों में घुस गया, जिससे सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और किसानों में हड़कंप मच गया।
घटना के बाद नहर का पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे गेहूं और सरसों की तैयार और खड़ी फसलें पूरी तरह डूब गईं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की मरम्मत नहीं की गई तो नुकसान और बढ़ सकता है।

चार गांवों की फसलें बर्बाद, किसानों पर टूटा संकट
बिजनौर (Bijnor) जिले में नहर टूटने से सबसे ज्यादा नुकसान चार गांवों—माड़ी, उल्लेढ़ा, हीमपुर और पुठ्ठा—के किसानों को हुआ है। इन गांवों के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा कृषि भूमि में नहर का पानी भर गया है। खेतों में कई फीट तक पानी जमा हो जाने के कारण फसलें पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर हैं।
किसानों ने बताया कि इस समय गेहूं और सरसों की फसलें अपने महत्वपूर्ण चरण में थीं। नहर के पानी से फसलें गलने लगी हैं और यदि पानी जल्द नहीं निकाला गया तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। किसानों का कहना है कि इस बार पहले ही मौसम की मार झेल रहे थे, अब नहर टूटने से उनकी कमर टूट गई है।
सिंचाई विभाग को दी सूचना, कार्रवाई का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने बिजनौर (Bijnor) सिंचाई विभाग को सूचना दी। किसानों का आरोप है कि नहर की पटरी पहले से ही कमजोर थी, जिसकी शिकायत कई बार की गई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं की गई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज सैकड़ों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नहर की पटरी को तुरंत दुरुस्त कराया जाए और खेतों में भरे पानी की निकासी कराई जाए। साथ ही किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
प्रशासन पर उठे सवाल, मुआवजे की मांग तेज
नहर टूटने की इस घटना के बाद बिजनौर (Bijnor) प्रशासन और सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की मरम्मत कर दी जाती, तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। अब किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
बिजनौर (Bijnor) जिले के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ और मुआवजे की घोषणा नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल किसान खेतों में भरे पानी को देखकर मायूस हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।