Mau Farmer News
ड्रिप और बेड विधि से गाजर की खेती कर रहे प्रगतिशील किसान
Mau Farmer News उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के एक किसान ने गाजर की खेती का अनोखा तरीका अपनाकर अच्छी पैदावार और मुनाफा कमाने की मिसाल पेश की है। प्रगतिशील किसान रामलेश मौर्य ड्रिप सिस्टम और बेड विधि से गाजर की खेती कर रहे हैं, जिससे कम समय में बेहतर उत्पादन मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर किसान सही तकनीक अपनाएं तो गाजर की खेती से कम समय में अच्छी कमाई की जा सकती है।
ड्रिप लगाकर बेड विधि से कर रहे गाजर की खेती
मीडिया में किसान रामलेश मौर्य ने बताया कि वह ब्लाउज किस्म की गाजर की खेती कर रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक समतल खेत की जगह ड्रिप सिस्टम के साथ बेड विधि अपनाई है।
आमतौर पर गाजर की खेती में अधिक समय लगता है, लेकिन इस तकनीक से लगभग दो महीने में गाजर की फसल हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि यह तरीका उन्हें उद्यान विभाग के अधिकारियों से मिला, जिसके बाद उन्होंने इसे अपनाया और अब उनकी फसल लगभग तैयार हो चुकी है।
2500 रुपये की लागत में डेढ़ लाख तक कमाई
रामलेश मौर्य बताते हैं कि वह एक बीघा जमीन में गाजर की खेती कर रहे हैं। इसमें करीब 2000 से 2500 रुपये का बीज लगा है। एक बेड से लगभग ढाई से तीन कुंतल गाजर की पैदावार मिल जाती है।
उन्होंने बताया कि गाजर की यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है और इतने कम खर्च में वह एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
उद्यान विभाग से मिला खेती का आइडिया
रामलेश मौर्य ने बताया कि उन्हें यह आइडिया उद्यान विभाग के अधिकारी संदीप गुप्ता से मिला। उन्होंने सलाह दी कि ड्रिप और बेड विधि से गाजर की खेती करने से कम समय में बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। इसी सलाह पर उन्होंने यह खेती शुरू की।

गाजर के साथ कई फसलों की भी खेती
रामलेश मौर्य के परिवार में तीन से चार लोग सरकारी नौकरी करते हैं, लेकिन उन्होंने पारंपरिक खेती को नहीं छोड़ा। उनका एक बेटा आईटीआई करने के बाद खेती में ही जुटा हुआ है।
रामलेश मौर्य का कहना है कि अगर सभी लोग नौकरी करेंगे तो खेती कौन करेगा। इसी सोच के साथ वह बड़े पैमाने पर खेती कर रहे हैं। गाजर के अलावा वह बीन्स, स्ट्रॉबेरी, कद्दू, गोभी और ड्रैगन फ्रूट की भी खेती कर रहे हैं। Mau Farmer News
खेत में रोज काम करते हैं 7–8 मजदूर
विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती होने के कारण उनके खेत में रोजाना 7 से 8 मजदूर काम करते हैं। अलग-अलग फसलों की रोजाना कटाई और देखभाल के लिए मजदूरों की जरूरत पड़ती है।
रामलेश मौर्य का कहना है कि अगर किसान नई तकनीक अपनाएं तो खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकता है। Mau Farmer News