UP Politics:
UP Politics: लखनऊ/दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति तेज हो गई है। जहां सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसकी प्रक्रिया और मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
इसी क्रम में समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस जल्दबाजी में इसे लाया जा रहा है, हम उसके खिलाफ हैं।”

UP Politics: “खुफिया योजना के तहत लाया गया बिल”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला “खुफिया लोगों की गुप्त योजना” का हिस्सा है और सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारदर्शिता के साथ नहीं लाया गया है।
UP Politics: जातीय जनगणना का मुद्दा फिर उठा
उन्होंने जातीय जनगणना की मांग को दोहराते हुए कहा, “अगर जनगणना होगी तो देश जातिगत जनगणना की मांग करेगा और जब जातिगत जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा। सरकार इन सब से बचना चाहती है।”
उनका कहना था कि बिना सही आंकड़ों के आरक्षण देना न्यायसंगत नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब तक सही डेटा नहीं होगा, तब तक आरक्षण कैसे सही तरीके से लागू होगा?”
UP Politics: सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया कदम
अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके मुताबिक, यह कदम पीड़ित, दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के हितों के विपरीत हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश में केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि संरक्षण की भी जरूरत है।
UP Politics: आरक्षण प्रतिशत और प्रतिनिधित्व पर सवाल
महिला आरक्षण के प्रतिशत को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर पिछड़ों की आबादी 66% तक मानी जाए, तो 33% आरक्षण महिलाओं के अधिकारों को सीमित कर सकता है और सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकता है।
UP Politics: परिसीमन और पुराने आंकड़ों पर आपत्ति
अखिलेश यादव ने परिसीमन (Delimitation) और पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू करने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण तय करना उचित नहीं है।
उनका स्पष्ट मत है कि नई जनगणना के बाद ही इस तरह के बड़े फैसले लिए जाने चाहिए, ताकि सभी वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।