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अमेठी: वेस्ट मटेरियल से तैयार किया ऐतिहासिक चारमीनार का मॉडल
उत्तर प्रदेश के Amethi जिले की एक होनहार छात्रा ने अपनी प्रतिभा से यह साबित कर दिया कि हुनर संसाधनों का मोहताज नहीं होता। कम उम्र की छात्रा Asmita Yadav ने बेकार समझे जाने वाले ‘वेस्ट मटेरियल’ से Charminar का शानदार मॉडल तैयार कर सबको चौंका दिया है।
खास बात यह है कि इस मॉडल को बनाने में छात्रा ने मात्र ₹100 की लागत लगाई और इसमें रत्ती भर भी कागज का इस्तेमाल नहीं किया। अस्मिता की इस रचनात्मकता की हर तरफ सराहना हो रही है। Amethi
कई सामाजिक उपयोग वाले प्रोजेक्ट भी बनाए
अस्मिता यादव केवल चारमीनार का मॉडल बनाने तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने समाज के उपयोग से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी तैयार किए हैं।
सबसे पहले कक्षा 5 में उन्होंने किसानों के लिए पानी बचाने वाला सिंचाई यंत्र बनाया। इसके अलावा दिव्यांग लोगों के लिए सेंसर वाली ब्लाइंड स्टिक तैयार की, जिसकी लागत करीब ₹1500 रही। इसके बाद उन्होंने राम मंदिर का मॉडल भी तैयार किया। Amethi
उनके इन प्रोजेक्ट्स को मंडल स्तर पर काफी सराहना मिल चुकी है और कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
किसान की बेटी, RTE के तहत कर रही पढ़ाई
अस्मिता यादव अमेठी जिले के गौरीगंज की रहने वाली हैं और एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। उनके पिता किसान हैं और वह RTE (राइट टू एजुकेशन) के तहत अपनी पढ़ाई कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अस्मिता ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। Amethi
इतिहास को जीवंत करने की कोशिश
अस्मिता ने अपने प्रोजेक्ट के जरिए इतिहास को भी जीवंत करने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि असली Charminar का निर्माण 1591 में कुतुब शाही वंश के शासक Muhammad Quli Qutb Shah ने कराया था।
करीब 184 फीट ऊंची इस ऐतिहासिक इमारत को उस दौर में बड़ी लागत से बनाया गया था। इसी इतिहास को सामने लाने के लिए अस्मिता और उनकी सहेली ने इसका मॉडल तैयार किया, जिसे बनाने में करीब 5 दिन का समय लगा। Amethi
महामारी के अंत की याद में बना था चारमीनार
अस्मिता ने बताया कि चारमीनार का निर्माण 1589 में शुरू हुआ था और 1591 में पूरा हुआ। उस समय फैली हैजा जैसी भीषण महामारी के खत्म होने की खुशी में इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण कराया गया था।
उनके इस प्रोजेक्ट को इतिहास विभाग ने भी काफी सराहा है और उन्हें इंस्पायर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। अब तक अस्मिता मंडल स्तर पर 4 से 5 प्रोजेक्ट्स के लिए पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं।
शिक्षकों और सहेलियों का मिला पूरा सहयोग
अस्मिता यादव अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और सहेलियों को देती हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में उनकी प्रोजेक्ट डायरेक्टर आराध्या मैम और स्कूल के शिक्षकों ने काफी मार्गदर्शन दिया।
साथ ही उनकी सहेलियों आराधना, पूजा और अन्य साथियों ने भी इस प्रोजेक्ट को बनाने में सहयोग किया। अस्मिता का कहना है कि आगे भी वह ऐसे प्रोजेक्ट बनाएंगी जो सीधे समाज के लोगों के काम आएं।