Sambhal File Photo
संभल (Sambhal) (संवाददाता महबूब अली) : उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में जारी बुलडोजर कार्रवाई को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संभल (Sambhal) में जारी कार्रवाइयों के संदर्भ में AIMIM के एक पार्टी वक्ता ने कहा कि “संभल से चला बुलडोजर अब पूरे हिंदुस्तान में गरज रहा है” और यह कार्रवाई न्याय का नहीं, बल्कि संविधान को कुचलने का प्रतीक बनती जा रही है।
AIMIM ने आरोप लगाया कि बुलडोजर का इस्तेमाल खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर किया जा रहा है। वक्ता ने कहा कि मस्जिदों, मदरसों और खानकाहों पर जिस तरह से कार्रवाई की जा रही है, उससे यह साफ प्रतीत होता है कि यह केवल अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक विशेष समुदाय को भयभीत और हतोत्साहित करने की राजनीति है।

“क्या गलत जगह पर बने सभी धार्मिक स्थल सिर्फ मुसलमानों के हैं?”
संभल (Sambhal) से AIMIM वक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अवैध निर्माण या सरकारी भूमि पर कब्जे की बात है, तो क्या देश में गलत जगह पर बने सभी धार्मिक स्थल केवल मुसलमानों के ही हैं? उन्होंने पूछा कि ग्राम समाज, तालाब, सड़क या सरकारी जमीन पर बने ढांचे क्या सिर्फ मुस्लिम समुदाय से ही जुड़े हुए हैं?
संभल (Sambhal) से वक्ता ने आरोप लगाया कि चाहे बिजली की चेकिंग हो, अवैध निर्माण के नाम पर कार्रवाई हो या अतिक्रमण हटाने का अभियान—प्रशासन की नजर बार-बार मुस्लिम बहुल इलाकों और इबादतगाहों पर ही जाती है। AIMIM ने सवाल किया कि क्या अन्य धर्मों से जुड़े लोग पूरी तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, या फिर उनके मामलों में समान रूप से जांच और कार्रवाई क्यों नहीं होती?
“बुलडोजर बन गया है न्याय का नया चेहरा”
AIMIM के अनुसार संभल (Sambhal) में मौजूदा हालात में बुलडोजर को न्याय का प्रतीक बनाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है। वक्ता ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में न्याय का आधार कानून, संविधान और न्यायपालिका होती है, न कि प्रशासनिक बुलडोजर।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को टारगेट कर देशभर में निराशा और भय का माहौल बनाया जा रहा है। यह न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि संविधान में दिए गए समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।
न्यायालय के आदेश से पहले कार्रवाई का आरोप
संभल (Sambhal) प्रशासन द्वारा अक्सर यह दावा किया जाता है कि बुलडोजर कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है। इस पर AIMIM वक्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में अदालत का अंतिम आदेश आने से पहले ही कार्रवाई कर दी जाती है। प्रभावित लोगों को इतना कम समय दिया जाता है कि वे अदालत तक पहुंचकर अपना पक्ष भी नहीं रख पाते।
उन्होंने कहा कि पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, लेकिन यदि लोगों को उचित समय और अवसर ही नहीं दिया जाएगा, तो न्याय कैसे संभव होगा? AIMIM ने इसे “न्यायिक प्रक्रिया का मजाक” करार दिया।
“संविधान बचाने की लड़ाई जारी रहेगी”—AIMIM
अंत में संभल (Sambhal) से AIMIM वक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी “बुलडोजर राजनीति” के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि AIMIM संविधान को बचाने वाली ताकत है और संविधान को कमजोर करने की हर कोशिश का कानूनी, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से डटकर मुकाबला किया जाएगा।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगी, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक एकता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।