LARA Court Ne Diya Bijnor DM Aawas Kurk Ka Aadesh
बिजनौर (Bijnor) (संवाददाता महेंद्र सिंह) : भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का भुगतान न होने के मामले में मुरादाबाद स्थित लारा कोर्ट (भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण) ने बड़ा और सख्त आदेश दिया है। कोर्ट ने बिजनौर (Bijnor) के जिलाधिकारी के शासकीय आवास को कुर्क करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही जिलाधिकारी को 9 जनवरी 2026 को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

चार साल पुरानी डिक्री के बावजूद नहीं मिला मुआवजा
बिजनौर (Bijnor) का यह मामला भूमि अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, लारा कोर्ट ने 13 मार्च 2020 को मुआवजा भुगतान से संबंधित एक डिक्री पारित की थी। इस डिक्री में स्पष्ट निर्देश थे कि प्रभावित किसानों/भूमि स्वामियों को निर्धारित मुआवजा समय से भुगतान किया जाए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि डिक्री पारित होने के चार वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया।
कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि इस दौरान बिजनौर (Bijnor) प्रशासन को कई बार नोटिस भेजे गए। यहां तक कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के तहत भी आवश्यक कार्यवाही की गई, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया।
नोटिस और चेतावनी भी बेअसर
लारा कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बिजनौर (Bijnor) प्रशासन को बार-बार अवसर दिए गए। मुआवजा भुगतान के लिए स्मरण पत्र, नोटिस और कानूनी चेतावनियां जारी की गईं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गई। कोर्ट ने इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना है।
कोर्ट का कहना है कि भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रभावित लोगों को समय पर मुआवजा मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। लंबे समय तक भुगतान रोके जाने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि यह कानून के शासन पर भी सवाल खड़े करता है।
डीएम आवास कुर्क करने का आदेश
इन्हीं तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए लारा कोर्ट ने बिजनौर (Bijnor) के जिलाधिकारी के शासकीय आवास को कुर्क करने के आदेश दिए हैं। यह कदम बिजनौर (Bijnor) प्रशासन पर दबाव बनाने और न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया, तो आगे और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
9 जनवरी 2026 को डीएम तलब
कोर्ट ने जिलाधिकारी बिजनौर (Bijnor) को 9 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान डीएम को यह बताना होगा कि चार वर्षों तक मुआवजा भुगतान क्यों नहीं किया गया और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किन परिस्थितियों में हुई।
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी जिलाधिकारी के शासकीय आवास को कुर्क करने का आदेश बेहद असाधारण और गंभीर कदम माना जाता है। यह दर्शाता है कि न्यायालय प्रशासनिक उदासीनता को अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
किसानों में उम्मीद, प्रशासन पर सवाल
इस आदेश के बाद प्रभावित भूमि स्वामियों और किसानों में उम्मीद जगी है कि अब उन्हें उनका हक मिल सकेगा। वहीं दूसरी ओर, बिजनौर (Bijnor) जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि समय रहते न्यायालय के आदेश का पालन कर लिया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न न होती।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिजनौर (Bijnor) प्रशासन कोर्ट के आदेश के बाद कितनी तेजी से मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी करता है और 9 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी बिजनौर (Bijnor) न्यायालय में क्या पक्ष रखते हैं।