मिडिल ईस्ट तनाव का असर Kanpur के निर्यात कारोबार पर, ऑर्डर होल्ड पर, व्यापारियों की बढ़ी चिंता
Kanpur News
कानपुर (Kanpur): मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और Iran–Israel conflict के चलते अब इसका असर भारत के निर्यात कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर (Kanpur) इस स्थिति से प्रभावित होता नजर आ रहा है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में सामान गल्फ देशों में निर्यात किया जाता है।
निर्यात विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह युद्ध केवल एक सप्ताह भी चलता है, तब भी इसका प्रभाव करीब तीन महीने तक निर्यात कारोबार पर पड़ सकता है। इससे कानपुर के चमड़ा उद्योग और अन्य निर्यात आधारित कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

गल्फ देशों पर निर्भर है बड़ा बाजार
कानपुर (Kanpur) देश के प्रमुख निर्यात केंद्रों में गिना जाता है। यहां से चमड़ा उत्पाद, जूते, सैडलरी और रेडीमेड गारमेंट्स बड़ी मात्रा में मिडिल ईस्ट के देशों में भेजे जाते हैं।
इनमें प्रमुख बाजार United Arab Emirates, Saudi Arabia, Qatar, Kuwait और Oman जैसे देश हैं।
यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर यहां के व्यापार को प्रभावित करता है।
तीन महीने तक रह सकता है असर
कानपुर (Kanpur) निर्यात से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह भरोसे और स्थिरता पर आधारित होता है। जैसे ही किसी क्षेत्र में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, विदेशी खरीदार सतर्क हो जाते हैं और नए ऑर्डर देने से बचते हैं।
Federation of Indian Export Organisations के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि अगर युद्ध एक सप्ताह तक भी चलता है तो उसका असर लगभग तीन महीने तक बना रहता है।
उनके मुताबिक युद्ध खत्म होने के बाद भी बाजार में भरोसा लौटने में समय लगता है, क्योंकि विदेशी खरीदार यह देखना चाहते हैं कि हालात पूरी तरह सामान्य हो चुके हैं या नहीं।
कई ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर
कानपुर (Kanpur) के निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल कई संभावित ऑर्डर होल्ड पर रख दिए गए हैं। विदेशी बायर्स स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
सिर्फ बायर्स ही नहीं, बल्कि कई बार निर्यातक भी उन देशों के साथ तुरंत व्यापार करने से बचते हैं जो हाल ही में युद्ध या सैन्य तनाव के केंद्र में रहे हों। उन्हें भुगतान व्यवस्था, शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स को लेकर जोखिम का डर रहता है।
इसी वजह से व्यापार धीरे-धीरे सामान्य होता है और इसमें कई महीने लग जाते हैं।
ईद सीजन की मांग भी प्रभावित
आमतौर पर ईद के आसपास गल्फ देशों में भारतीय उत्पादों की मांग काफी बढ़ जाती है। खासकर कपड़े, जूते और फैशन से जुड़े उत्पादों की बड़ी खपत होती है।
लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार का माहौल थोड़ा ठंडा पड़ गया है। व्यापारियों का कहना है कि कई बायर्स ने अभी ऑर्डर देने में जल्दबाजी नहीं दिखाई है।
हालात सामान्य होने की उम्मीद
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में हालात जल्द सामान्य हो जाते हैं तो बाजार धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकता है। हालांकि उसके बाद भी ऑर्डर की गति सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भरोसा लौटने की प्रक्रिया धीमी होती है।
फिलहाल कानपुर (Kanpur) के निर्यातक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति स्थिर होगी, जिससे शहर का निर्यात कारोबार फिर से रफ्तार पकड़ सके।