Shamli File Photo
शामली संवाददाता ( दीपक राठी): उत्तर प्रदेश के शामली (Shamli) जनपद के झिंझाना क्षेत्र के चौसाना गांव में किसानों को डीएपी खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। गेहूं की बुवाई के इस crucial समय में पर्याप्त मात्रा में खाद न मिलने से किसानों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। मंगलवार को सुबह से ही चौसाना सहकारी समिति पर हजारों किसानों की लंबी कतारें लगीं, लेकिन सात हजार किसानों के लिए केवल 500 कट्टे डीएपी खाद ही उपलब्ध कराए गए। यह स्टॉक चार घंटे के भीतर ही समाप्त हो गया, जिससे अधिकांश किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हो गए।

समिति की व्यवस्था फेल, किसानों में बढ़ा आक्रोश
शामली (Shamli) जनपद के झिंझाना क्षेत्र के चौसाना गांव में डीएपी वितरण के दौरान समिति ने यह नियम बनाया कि किसी भी किसान को पांच कट्टों से अधिक खाद नहीं दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसानों को खाद मिल सके। लेकिन हकीकत यह रही कि बड़ी संख्या में किसानों को एक-एक बोरा खाद देकर वापस भेज दिया गया।
किसानों ने बताया कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद उन्हें बमुश्किल एक कट्टा ही मिल पाया, जबकि उनकी जमीन 30 से 50 बीघा तक की है। कई किसानों ने शिकायत की कि खाद वितरण में भारी अव्यवस्था रही और अधिकारियों ने कोई समाधान नहीं निकाला।
समिति के सचिव विपिन कुमार ने बताया कि समिति के अंतर्गत करीब सात हजार किसान पंजीकृत हैं, जिनकी कुल कृषि भूमि लगभग 30 हजार बीघा है। ऐसे में मात्र 500 बोरे खाद ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। सचिव ने कहा कि जिला मुख्यालय से जल्द ही अतिरिक्त खाद की आपूर्ति की मांग की गई है।
चार घंटे में खत्म हुआ स्टॉक, किसानों के बीच मची अफरा-तफरी
शामली (Shamli) जिले के चौसाना गांव में मंगलवार को सुबह से शुरू हुआ वितरण मात्र चार घंटे में समाप्त हो गया। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को खाद के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है।
45 बीघा के किसान कामिल राणा को सिर्फ पांच बोरे, 30 बीघा के छोटा को दो बोरे, जबकि 40 बीघा के मास्टर शादाब को केवल तीन कट्टे डीएपी मिले। कई किसानों जैसे सुधीर शर्मा, सोनू, मुस्ताक, निसार मुखिया, शब्बीर, उम्मेद, अफसर अली, धर्मवीर, बिन्नी और मेहर सिंह को घंटों लाइन में लगने के बावजूद एक बोरा भी नहीं मिल पाया।
फोन स्विच ऑफ कर भागे अधिकारी, बढ़ी किसानों की नाराजगी
शामली (Shamli) जिले के झिंझाना क्षेत्र में डीएपी की कमी और शिकायतों की बाढ़ के बीच समिति के सचिव और कर्मचारियों ने अपने मोबाइल फोन तक बंद कर लिए ताकि लगातार हो रही शिकायतों से बचा जा सके। किसानों ने आरोप लगाया कि समिति शामली (Shamli) प्रशासन ने पहले से ही यह नहीं बताया कि केवल 500 कट्टे ही आए हैं। यदि जानकारी होती तो सैकड़ों किसान लाइन में लगने से बच जाते।
शामली (Shamli) के किसानों का कहना है कि बुवाई का समय तेजी से निकल रहा है और यदि अगले कुछ दिनों में खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई, तो गेहूं की फसल पर इसका सीधा असर पड़ेगा। कई किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द डीएपी की सप्लाई नहीं मिली तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
डीएपी संकट से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) खाद गेहूं की बुवाई के लिए सबसे आवश्यक तत्वों में से एक है। इसकी कमी से मिट्टी में फॉस्फोरस की मात्रा घटती है, जिससे अंकुरण और फसल की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
शामली (Shamli) के किसानों का कहना है कि बाजार में भी डीएपी खाद ब्लैक में ऊंचे दामों पर बिक रही है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। जहां समिति पर खाद ₹1,350 प्रति बोरा मिलनी चाहिए, वहीं खुले बाजार में यह ₹1,800 से ₹2,000 में बेची जा रही है।
किसानों की मांग: तुरंत भेजी जाए खाद की खेप
शामली (Shamli) जिले के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि चौसाना सहकारी समिति पर जल्द अतिरिक्त डीएपी खाद भेजी जाए, ताकि सभी किसानों को बराबर मात्रा में खाद मिल सके और वे समय पर गेहूं की बुवाई पूरी कर सकें।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दो-तीन दिन में आपूर्ति नहीं की गई तो वे शामली (Shamli) जिले के झिंझाना क्षेत्र के तहसील मुख्यालय पर धरना देने को मजबूर होंगे।